रक्षा लेखा महा नियंत्रक

र. ले. म. नि. की कलम से

राजभाषा कोना पत्र सूचना

रक्षा लेखा विभाग के बारे में

रक्षा लेखा विभाग जिसका प्रमुख रक्षा लेखा महानियंत्रक है, वित्तीय सलाहकार(रक्षा सेवाएं) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करता है। रक्षा लेखा विभाग का मुख्य उत्तरदायित्व आपूर्ति एवं निर्माण/ सुधार कार्यो, वेतन एवं भत्ते, फुटकर प्रभार, पेंशन इत्यादि के लिए प्रदान की गई सेवा के बिलों सहित सशस्त्र बलों से संबंधित सभी प्रभारों की लेखापरीक्षा, भुगतान और लेखांकन है। विभाग, तीनों सेवाओं में विभिन्न इकाइयों और विरचनाओं(आयुद्धगार, कार्यशालाओं और भंडार डिपुओं सहित) के रोकड़ एवं भंडार लेखाओं की लेखापरीक्षा और सैन्य अधिकारियों और सेना के सैनिकों के वेतन लेखाओं के अनुरक्षण के प्रति भी उत्तरदाय़ी है। आयुद्ध फैक्टरियों और नौसेना गोदीवाड़ा के विनिर्माण लेखा तथा आयुद्ध फैक्टरियों के भंडार लेखा भी रक्षा लेखा विभाग द्वारा रखे जाते हैं। वे निर्माण कार्यों से संबंधित लेखाओं का अनुरक्षण एवं मिलिटरी इंजीनीयरिंग सेवाओं द्वारा अनुरक्षित निर्माण कार्य परियोजना से संबंधित निर्माण एवं अन्य लेखाओं की लेखा परीक्षा भी करते हैं। उपरोक्त उत्तरदायित्वों के अतिरिक्त रक्षा लेखा नियंत्रक कमानों के जनरल ऑफिसर्स कमांडिंग-इन-चीफ, एरिया कमांडरों इत्यादि के स्थानीय वित्तीय सलाहकार के रूप में भी कार्य करता है।

रक्षा लेखा विभाग रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है जिसका प्रमुख रक्षा लेखा महानियंत्रक होता है। रक्षा लेखा विभाग संगठन मुख्यतः तीनों सेवाओं के संगठनों से संगत है। इसके अतिरिक्त यह आयुद्ध फैक्टरियों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, कैंटीन भंडार विभाग, तट-रक्षक, सीमा-सड़क संगठन और मंत्रालय के अधीन अंतर-सेवा संगठनों को भी सेवाएं प्रदान करता है।

सेना से व्यवहार करने वाले विभाग के फील्ड संगठन की संरचना सामान्यतः सेना कमानों/ क्षेत्रों की पद्धति के अनुसार की गई है। ये नियंत्रक कार्यालय कमान मुख्यालयों/ क्षेत्रीय मुख्यालयों के निकट स्थित हैं ताकि ये इन क्षेत्रों में स्थित इकाइयों/ विरचनाओं को आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सेवाएं प्रदान कर सकें। कुछ नियंत्रक कार्यालयों के अधीन उप-क्षेत्रों को त्वरित सेवा प्रदान करने के लिए क्षेत्रीय लेखा कार्यालय भी हैं। इसके अतिरिक्त, इकाइयों एवं विरचनाओं के लेखाओं की लेखापरीक्षा के लिए स्थानीय लेखा परीक्षा कार्यालय हैं तथा एक यूनिट लेखाकार प्रत्येक गैरिसन इंजीनियर के साथ कार्य कर रहा है। वेतन लेखा कार्यलय(जेसीओएस/ अन्य श्रेणी) भी निकटतम क्षेत्रीय नियंत्रक के अधिकार क्षेत्र में आता है। कुल मिला कर 12 क्षेत्रीय नियंत्रक हैं। इसके अतिरिक्त, पुणे स्थित एक रक्षा लेखा नियंत्रक विनिर्दिष्ट रूप से कमीशन अफसरों के वेतन एवं भत्ते का कार्य देखता है।

दिल्ली स्थित रक्षा लेखा नियंत्रक (मुख्यालय) के जो सभी सेवाओं, अंतर सेवा संगठनों और रक्षा मंत्रालय को कवर करता है के अतिरिक्त शेष नियंत्रक कार्यालय किसी विशेष सेवा या कार्य कर रहे हैं। नौसेना का कार्य देखने वाला रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक मुम्बई में हैं।वायुसेना के मामले में दो रक्षा लेखा नियंत्रक हैं, एक देहरादून स्थित रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक है जो सभी कमानों एवं फील्ड एरिया का कार्य देखता है दूसरा नियंत्रक दिल्ली में है जो वायु मुख्यालय सहित दिल्ली स्थित यूनिटों का कार्य देखता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का व्यापक विस्तार हुआ है तथा रक्षा प्रयोगशालाओं द्वारा अनेकों परियोजनाओं को रूप दिया जा रहा है। तदनुसार, पुणे, देहरादून, और बालासौर में कार्यरत अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रीय संयुक्त नियंत्रक के साथ अनु. एवं वि. संगठन के साथ जुड़े सभी मामलों से संबंधित सभी कार्य देखने के लिए नई दिल्ली में अनुसंधान एवं विकास के लिए एक रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक और बैंगलूर एवं हैदराबाद में एक-एक नियंत्रक तैनात हैं। कैंटीन भंडार विभाग के लिए मुम्बई में एक नियंत्रक है। इसी प्रकार, सीमा सड़क के लिए पृथक रूप से नई दिल्ली में एक नियंत्रक स्थापित है।

आयुद्ध फैक्टरी बोर्ड के अधीन आयुद्ध फैक्टरी संगठन की 39 फैक्टरियां हैं। इन फैक्टरियों का भुगतान, लेखांकन, आंतरिक लेखापरीक्षा और वित्तीय सलाह संबंधी सभी कार्य कोलकाता स्थित प्रधान लेखा नियंत्रक(फैक्टरी) द्वारा किए जाते हैं। मुख्यालय में एक नियंत्रक तथा मुख्य आयुद्ध एवं वस्त्र फैक्टरियों के पास स्थित 10 नियंत्रक(फैक्टरी) उनकी सहायता करते हैं। यह जटिल लेखा ढ़ांचा आयुद्ध एवं वस्त्र फैक्टरियों के लागत लेखा से संबंधित कार्य करने वाले विभाग का एक विशिष्ट भाग है।

रक्षा का पेंशन स्थापना वास्तविक रुप से वृद्धि कर रहा है। फलस्वरूप, हकदारी तय करने औऱ पेंशन के त्वरित भुगतान करने के विभाग के उत्तरदायित्व में वृद्धि हुई है। इस जटिल कार्य को करने के लिए इलाहाबाद स्थित रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक है जिसके द्वारा सेवा कार्मिकों(वायु सेना एवं नौसेना कार्मिकों के अतिरिक्त जिनकी स्वीकृति क्रमशः र.ले.नि.(वा.से.) तथा र.ले.नि.(नौसेना) द्वारा दी जाती है) , रक्षा सिविलियनों और रक्षा लेखा विभाग के स्टाफ की पेंशन स्वीकृति का कार्य द्वारा किया जाता है। उन्हें मुख्य कार्यालय में एक रक्षा लेखा नियंत्रक से सहायता प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त, मेरठ में एक रक्षा लेखा नियंत्रक है जो विभिन्न राज्यों में स्थित 49 रक्षा पेंशन कार्यालयों के द्वारा पेंशन के संवितरण का कार्य देखता है। रक्षा लेखा नियंत्रक, चैन्नई जो चार दक्षिणी राज्यों के पेंशन संवितरण के प्रति उत्तरदायी है के अधीन 11 रक्षा पेंशन संवितरण कार्यालय हैं ।

सेना के सिविलियन कार्मिकों तथा रक्षा लेखा विभाग के स्टाफ के सामान्य भविष्य निधि का अनुरक्षण रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक(निधि) जो रक्षा लेखा नियंत्रक(सेना), मेरठ के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करता है, के द्वारा किया जाता है। अन्य रक्षा सिविलियनों के सामान्य भविष्य निधि खातों का अनुरक्षण वित्त एवं लेखा नियंत्रक(फैक्टरी), रक्षा लेखा नियंत्रक(अनु. एवं वि.), रक्षा लेखा नियंत्रक(नौसेना) तथा रक्षा लेखा नियंत्रक(सीमा सड़क) जैसे संबंधित कार्यात्मक नियंत्रकों द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त मेरठ में एक रक्षा लेखा नियंत्रक(प्रशिक्षण) हैं जो विभाग के कार्मिकों की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है।ि उत्तरदायी है के अधीन 11 रक्षा पेंशन संवितरण कार्यालय हैं ।

रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक(मुख्यालय), नई दिल्ली, दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय, सेना एवं नौसेना मुख्यालय तथा अंतर-सेवाएं संगठनों के वेतन एवं भत्ते, यात्रा भत्ता दावों और निधि खातों संबंधी कार्य देखता है। यह नियंत्रक, उपरोक्त संगठनो से संबंधित आकस्मिक एवं फुटकर प्रभारों से संबंधित दावों संबंधी कार्य भी देखता है। इसके अतिरिक्त, यह नियंत्रक रक्षा आपूर्ति विभाग द्वारा दिए गए संविदाओं सहित विदेशी संविदाओं, सेना क्रय संगठन द्वारा किए गए क्रयों का भुगतान और लंदन एकाउंट करंट संबंधी कार्य से संबंधित सभी कार्यों को देखता है।

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